पटना, 02 अक्टूबर (अविनाश कुमार) मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि बिहार फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ा बाजार है। यहां के लोग जब तक सिनेमा से नहीं जुड़ेंगे, तब तक कोई भी फिल्म पूरी तरह सफल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बिहार की ताकत उसकी संस्कृति और बड़ी संख्या में दर्शक है। फिल्मों में स्थानीय विषयों को जगह देने से दर्शकों का जुड़ाव बढ़ सकता है।मुख्यमंत्री ने पीएंडएम मॉल स्थित सिनेपोलिस में दैनिक जागरण फिल्म उत्सव का उद्घाटन किया। इस मौके पर कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी, दैनिक जागरण बिहार के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी और बिहार के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने हाल में रिलीज हुई एक फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें छठ को विषय बनाया गया और फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। उन्होंने इसे बिहार की सांस्कृतिक ताकत से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय समाज और संस्कृति को फिल्मों में प्रमुखता मिलनी चाहिए।

जागरण समूह के ‘घुमंतू’ फिल्म उत्सव की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे अनोखी पहल बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इसका नाम ‘घुमंतू’ के बजाय ‘चलंतू’ रखा जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसे प्रयासों को पूरा सहयोग देगी। उनके अनुसार, फिल्म उत्सव बिहार के समाज और संस्कृति को मुख्यधारा से जोड़ने तथा राज्य की विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है। भोजपुरी फिल्मों के डबल मीनिंग संवाद पर सख्ती के संकेतमुख्यमंत्री ने भोजपुरी फिल्मों में डबल मीनिंग संवादों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे बिहार की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने कला एवं संस्कृति मंत्री को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। फिल्म निर्माताओं से उन्होंने समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों और अच्छे कार्यों को फिल्मों में दिखाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बिहार की बाढ़ की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ का संकट नेपाल और अन्य राज्यों से आने वाले पानी से बढ़ता है।

सरकार इसके समाधान के लिए ठोस योजना के साथ काम कर रही है।कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि अब बिहार में फिल्म फेस्टिवल आयोजित हो रहे हैं और शूटिंग भी हो रही है। उन्होंने नई फिल्म नीति को सकारात्मक माहौल बनाने वाला कदम बताया।दैनिक जागरण के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह ने कहा कि फिल्म जगत में बिहार की पुरानी पहचान रही है, लेकिन उसे अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने ‘पाथेर पांचाली’, ‘देवदास’ और ‘परिणीता’ के बिहार से जुड़े संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म उत्सव का उद्देश्य सिनेमा के प्रति पारिवारिक वातावरण बनाना और बिहार को फिल्म जगत में उसका उचित स्थान दिलाना है।













