पटना, 06 सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार में लगातार बारिश के बाद गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि ने निचले इलाकों में तबाही मचा दी है। पटना समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। कई प्रभावित परिवार पिछले कई दिनों से ऊंची सड़कों और तटबंधों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। गंगा के उफान और जलस्तर बढ़ने से निचले रिहायशी इलाकों में पानी तेजी से फैल गया है। कई मकानों में कई फीट तक पानी भर जाने से घर में रखा आटा, चावल, दाल, कपड़े और अन्य जरूरी सामान बर्बाद हो गया। प्रभावित परिवारों के सामने अब भोजन, पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है। जलजमाव के कारण घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पटना के प्रभावित इलाके में कई मकान पिछले तीन दिनों से करीब 7 से 8 फीट गहरे पानी में डूबे हैं। उनका कहना है कि परिवारों के पास पीने का पानी और भोजन तक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेकर लौट जाते हैं, लेकिन जरूरत के अनुरूप राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है। बाढ़ के कारण कई परिवारों को मजबूरी में सड़क किनारे और तटबंधों पर शरण लेनी पड़ी है। कुछ लोग अस्थायी प्लास्टिक टेंट लगाकर रात गुजार रहे हैं।

बारिश और चारों ओर पानी के बीच इन अस्थायी ठिकानों में रहना सबसे अधिक बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ प्रभावितों के लिए सुरक्षित निकासी और राहत पहुंचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। लोगों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ पर्याप्त पेयजल, भोजन और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाए। लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच स्थानीय लोगों में भय है। अब उनकी नजर प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था पर टिकी है।














