पटना, 05 सितम्बर (पटना डेस्क) भोजपुर में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण जलाशय, आहर-पोखर और गांवों के निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और खेत जलमग्न हैं। इस बीच बाढ़ के पानी में नहाने, तैरने और जलक्रीड़ा करने के लिए बच्चों और युवाओं के पहुंचने की तस्वीरें चिंता बढ़ा रही हैं। कई जगह सेल्फी और वीडियो रील बनाने का जुनून भी खतरे को नजरअंदाज करता दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बाढ़ के पानी में छिपे गड्ढे, दलदल, टूटे रास्ते और तेज धार का अंदाजा ऊपर से नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में पैर फिसलने या अचानक गहरे पानी में चले जाने से डूबने का खतरा रहता है। एक छोटी लापरवाही परिवार की खुशियां मातम में बदल सकती है। भोजपुर में पूर्व में ऐसे हादसे जानलेवा साबित हो चुके हैं। 15 मार्च 2023 को अजीमाबाद थाना क्षेत्र के अहिमनच बालू घाट पर चार बच्चों की डूबने से मौत हुई थी।

8 अक्टूबर 2023 को चांदी थाना क्षेत्र के बहियारा घाट पर सोन नदी में नहाने गईं पांच सहेलियों की डूबने से मौत हो गई थी। 13 अगस्त 2024 को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सारंगपुर गांव में नदी में डूबने से एक ही परिवार के चार लोग हादसे का शिकार हुए, जिनमें दो बच्चों की मौत हुई। 16 जून 2024 को शिवपुर गंगा घाट पर सेल्फी के दौरान चार युवकों की जान चली गई थी। 11 अगस्त 2024 को मझौंवा हवाई अड्डे के पास पानी से भरे गड्ढे में तीन दोस्तों की मौत हुई। वहीं 31 मई 2026 को चौरी थाना क्षेत्र के अंधारी गांव के पास सोन नदी में नहाने गए छह किशोरों में तीन की डूबने से मौत हो गई।

बाढ़ में बरतें सावधानी: बच्चों को पानी में नहाने या तैरने न दें। जलाशय, पोखर और नदी किनारे जाने से बचें। तेज बहाव को पैदल या बाइक से पार न करें और बिजली के खंभों से दूर रहें। प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड व बैरिकेडिंग कराने की जरूरत है। आपदा प्रबंधन भी लोगों से बाढ़ के पानी में नहीं उतरने की अपील कर रहा है।













