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अररिया में दिखेगी डॉल्फिन की छलांग: मीरगंज-त्रिशूलिया घाट पर बनेगा डॉल्फिन व्यू प्वाइंट, इको टूरिज्म को मिलेगा बूम

पटना, 29अगस्त (पटना डेस्क) परमान नदी के मीरगंज घाट और त्रिशूलिया घाट पर अब पर्यटकों को गांगेय डॉल्फिन के दीदार का रोमांच मिलेगा। जिला प्रशासन ने दोनों घाटों को आकर्षक डॉल्फिन व्यू प्वाइंट के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। क्षेत्र को इको टूरिज्म स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर जिलाधिकारी विनोद दूहन ने जिला वन पदाधिकारी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने और राष्ट्रीय गंगा समिति को इसकी सूचना देने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शनिवार को जिला गंगा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने, पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण, नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उपशमन कार्य, नदियों में पर्याप्त एवं सतत जल प्रवाह सुनिश्चित करने तथा नदी की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की गई।

डॉल्फिन व्यू प्वाइंट के प्रस्ताव को नदी संरक्षण और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके विकसित होने से स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ लोगों को नदी और जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नदियों की सफाई और जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने एकल उपयोग प्लास्टिक की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने को कहा। उन्होंने थोक विक्रेताओं को चिन्हित कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने तथा लगातार छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया।

डीएम ने जोगबनी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को सहायक अभियंता के माध्यम से जाल से संबंधित प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। इसके अलावा सभी नगर परिषदों और पंचायत क्षेत्रों में मूर्ति विसर्जन नियमावली का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया। बैठक में जिलाधिकारी ने नदियों के जल की गुणवत्ता की जांच प्रत्येक माह कराने का निर्देश दिया, ताकि प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। प्रशासन का जोर नदी संरक्षण, स्वच्छता और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के साथ परमान नदी क्षेत्र को पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर है।

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