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11 साल से उधार के टीन शेड में हो रहा न्याय, डुमरांव व्यवहार न्यायालय के स्थायी भवन का सपना अब भी अधूरा

बक्सर, 15 जुलाई (विक्रांत) डुमरांव अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का अपना स्थायी भवन बनने का सपना 11 वर्षों बाद भी अधूरा है। करोड़ों की न्यायिक व्यवस्था आज भी एक संकीर्ण टीन शेडनुमा भवन में संचालित हो रही है। भवन निर्माण के लिए नया भोजपुर के पास जमीन चिह्नित किए जाने और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद विधि विभाग से अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है, जिससे पूरी योजना अधर में लटक गई है। वर्तमान में व्यवहार न्यायालय पशुपालन विभाग के हरियाणा फार्म परिसर में उपलब्ध कराए गए अस्थायी भवन से संचालित हो रहा है। जगह की भारी कमी के कारण न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं को रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अदालत की महत्वपूर्ण फाइलों के सुरक्षित रखरखाव की भी गंभीर समस्या बनी हुई है। उमस भरी गर्मी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। गौरतलब है कि इस अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का उद्घाटन 16 जुलाई 2015 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एल. नरसिम्हा रेड्डी, तत्कालीन विधि मंत्री नरेंद्र नारायण यादव और तत्कालीन न्यायाधीश राजेंद्र कुमार मिश्रा की मौजूदगी में हुआ था। इसके बावजूद आज तक न्यायालय को अपना स्थायी भवन नसीब नहीं हो सका। प्रशासन ने पहले हरियाणा फार्म परिसर में लगभग छह एकड़ भूमि चिह्नित की थी, लेकिन निरीक्षण के बाद इसे उपयुक्त नहीं माना गया। इसके बाद नया भोजपुर के पास 5.57 एकड़ भूमि का चयन किया गया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा इस भूमि का निरीक्षण भी किया जा चुका है। डुमरांव नगर परिषद ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है।इसके बावजूद विधि विभाग से अब तक अंतिम स्वीकृति या रैयती भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण भवन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही विधि विभाग से स्वीकृति मिलेगी, व्यवहार न्यायालय, न्यायिक अधिकारियों के आवास और वकालतखाने के निर्माण का कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल न्यायालय का स्थायी भवन सिर्फ फाइलों तक ही सीमित होकर रह गया है।

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