• Home
  • मुख्य समाचार
  • प्रशांत किशोर की पढ़ाई पर उठे सवालों का खुला राज: चुनावी हलफनामे ने खोले शिक्षा के पन्ने, बिहार से फ्रांस तक का सफर आया सामने
Image

प्रशांत किशोर की पढ़ाई पर उठे सवालों का खुला राज: चुनावी हलफनामे ने खोले शिक्षा के पन्ने, बिहार से फ्रांस तक का सफर आया सामने

पटना, 14 जुलाई (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में इन दिनों जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर लगातार सुर्खियों में हैं। एक ओर वे राजनीतिक दलों और नेताओं की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विरोधी दलों द्वारा बार-बार उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए जाने के बीच अब चुनावी हलफनामे में दर्ज जानकारी सामने आने के बाद उनकी शिक्षा को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।हलफनामे के अनुसार, प्रशांत किशोर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार से ही प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 1991 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के तहत बक्सर स्थित एम.पी. हाई स्कूल से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1993 में बिहार के प्रतिष्ठित पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे उत्तर प्रदेश चले गए।वर्ष 1996 से 1999 के बीच उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस स्टडीज से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की डिग्री हासिल की। बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का निर्णय लिया।इसके बाद वर्ष 2001 से 2003 के दौरान उन्होंने हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (एएससीआई) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (एमएचए) की डिग्री प्राप्त की। बताया जाता है कि यह विशेष पाठ्यक्रम अमेरिका की प्रतिष्ठित जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और हिंदुजा अस्पताल के सहयोग से संचालित किया जाता था। इसी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के आधार पर उन्हें आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम करने का अवसर भी मिला।

शैक्षणिक यात्रा यहीं नहीं रुकी। वर्ष 2010 में प्रशांत किशोर ने फ्रांस की क्लेरमोंट फेरैंड यूनिवर्सिटी (कैविलैम विची) से फ्रेंच भाषा का एक इंटेंसिव कोर्स भी पूरा किया। बिहार के एक सरकारी स्कूल से शुरू हुआ उनका यह सफर विदेश तक पहुंचा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हलफनामे में सामने आई इन जानकारियों के बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग सकता है। हालांकि बिहार की राजनीति में उनके विचार, रणनीति और राजनीतिक दावों को लेकर बहस का दौर अभी भी लगातार जारी है।

Releated Posts

दरभंगा में आईटी क्रांति: आईटी पार्क में स्टार्टअप की बाढ़ लाने की तैयारी, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए दरवाजे

दरभंगा, 29 अगस्त (अजय राय) मिथिला में सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार को नई रफ्तार देने की कवायद तेज…

अररिया में दिखेगी डॉल्फिन की छलांग: मीरगंज-त्रिशूलिया घाट पर बनेगा डॉल्फिन व्यू प्वाइंट, इको टूरिज्म को मिलेगा बूम

पटना, 29अगस्त (पटना डेस्क) परमान नदी के मीरगंज घाट और त्रिशूलिया घाट पर अब पर्यटकों को गांगेय डॉल्फिन…

रक्षाबंधन के दिन चला बुलडोजर उजड़ गई मुसहरी, भाकपा माले ने प्रशासन पर भूमाफिया के इशारे पर कार्रवाई का लगाया आरोप

समस्तीपुर, 29 अगस्त (हर्षिता “अश्क”) ताजपुर प्रखंड की फतेहपुर पंचायत के वार्ड संख्या-3 स्थित मुसहरी में सरकारी जमीन…

थमा गंगा का कहर, मगर खतरा टला नहीं: जलस्तर घटा तो बढ़ी राहत, दियारा में अब भी तबाही का पानी

पटना, 29 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार में गंगा के उफान से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top