पटना, 21 जून (अविनाश कुमार) जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की राज्य परिषद और राष्ट्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को राजधानी पटना में आयोजित होगी। पार्टी मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में होने वाली इस बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि संगठन के विस्तार और मजबूती को लेकर कई बड़े प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। बैठक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार इसमें शामिल होंगे। इससे पहले जब भी वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, तब मुख्यमंत्री का पद भी उनके पास था।

ऐसे में मुख्यमंत्री पद से अलग होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका और रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक हलकों में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। खासकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में उनकी भूमिका को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला कर सकता है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। शनिवार को प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि पटना में आयोजित होने वाली यह बैठक ऐतिहासिक साबित होगी।

उन्होंने बताया कि देशभर से पार्टी के प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे और संगठन की मजबूती, भविष्य की रणनीति, सामाजिक न्याय, सुशासन तथा विकास जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। कुशवाहा ने कहा कि बीते दो दशकों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। अब इन उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में करीब 700 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। ऐसे में रविवार की यह बैठक न सिर्फ जदयू की भावी रणनीति तय करेगी, बल्कि बिहार की राजनीति को भी नया संदेश दे सकती है।
















