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सबौर में जुटेंगे 300 से अधिक कृषि वैज्ञानिक, 250 शोध प्रस्तुतियों के साथ तय होगी बिहार की खेती की नई दिशा

बक्सर, 18 जून (विक्रांत) बिहार की कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक मंथन शुक्रवार से शुरू होने जा रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के अनुसंधान निदेशालय द्वारा आयोजित 31वीं अनुसंधान परिषद बैठक (आरसीएम-खरीफ 2026) का शुभारंभ 19 जून को विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर में होगा। दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्घाटन कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह करेंगे। अनुसंधान निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रतिष्ठित बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों और संबद्ध संस्थानों के 300 से अधिक वैज्ञानिक भाग लेंगे।

बैठक के दौरान लगभग 250 शोध प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिनमें पिछले वर्ष किए गए अनुसंधान कार्यों की उपलब्धियों, निष्कर्षों और तकनीकी अनुशंसाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। बैठक में कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, फसल उत्पादकता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बागवानी, कृषि अभियंत्रण, पशुपालन और किसानों की बदलती जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी। विशेषज्ञ आगामी खरीफ मौसम के लिए अनुसंधान प्राथमिकताओं और तकनीकी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार करेंगे। इस वैज्ञानिक सम्मेलन में देश के कई प्रतिष्ठित कृषि विशेषज्ञ और शिक्षाविद मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।

इनमें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लो, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहायक महानिदेशक डॉ. एन.पी. सिंह, गन्ना अनुसंधान संस्थान पुसा के निदेशक डॉ. देवेन्द्र सिंह, सीआईएसएच लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कुमार तथा मैसूर विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर डॉ. आसना उरोज शामिल हैं। बैठक के दौरान अनुसंधान निदेशालय द्वारा तैयार कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रकाशनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। इनमें वार्षिक अनुसंधान प्रतिवेदन 2025-26, तकनीकी कार्यक्रम खरीफ-2026, बिहार में कीटनाशी अवशेष स्थिति रिपोर्ट, पीएमडीडीकेवाई रणनीतिक रोडमैप, बीएयू पोषण मार्गदर्शिका, स्टार्टअप एवं नवाचार वर्षपुस्तिका सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह परिषद विश्वविद्यालय की सर्वोच्च वैज्ञानिक समीक्षा एवं नियोजन प्रक्रिया है। यहां से प्राप्त सुझाव और अनुशंसाएं आगामी अनुसंधान गतिविधियों की दिशा तय करेंगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से निकलने वाले निष्कर्ष बिहार के किसानों के लिए नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन और टिकाऊ खेती का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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