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DNA से PCR तक का लाइव प्रशिक्षण, BAU सबौर में छात्रों ने सीखी आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी की अत्याधुनिक तकनीकें

बक्सर, 18 जून (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (सीएबीटी) ने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में छात्रों को व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। 3 जून से 17 जून 2026 तक चले इस प्रशिक्षण में टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर के बी.एससी. बायोटेक्नोलॉजी (ऑनर्स) पार्ट-द्वितीय के 16 छात्रों ने भाग लिया। “मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी की बुनियादी तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों से सीधे जोड़ना था।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने जीनोमिक डीएनए एक्सट्रैक्शन, एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर), प्लास्मिड डीएनए आइसोलेशन, एसडीएस-पेज, रिस्ट्रिक्शन डाइजेशन तथा रिकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी जैसी अत्याधुनिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को केवल प्रयोगशाला कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें बायोइंफॉर्मेटिक्स की दुनिया से भी परिचित कराया गया। प्रतिभागियों ने जैविक डेटाबेस का उपयोग कर जीन संबंधी जानकारी प्राप्त करने और उसका विश्लेषण करना सीखा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवन विज्ञान अनुसंधान में यह कौशल अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।

कई छात्रों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर उन्नत आणविक जीव विज्ञान तकनीकों को प्रयोगशाला में स्वयं करके देखा। इससे उनके आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता और वैज्ञानिक समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 17 जून को आयोजित समापन समारोह में छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दी है। इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता (कृषि) डॉ. ए.के. साह और सीएबीटी के प्राचार्य डॉ. रवि केसरी ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन सहायक प्राध्यापक-सह-कनिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रंजना कुमारी ने किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे व्यावहारिक शिक्षा, अंतर-संस्थागत सहयोग और उद्योग-अनुकूल वैज्ञानिक कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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