• Home
  • मुख्य समाचार
  • सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से बढ़ी सियासी हलचल: मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी पर संकट, इस्तीफे के सवाल पर तोड़ी चुप्पी
Image

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से बढ़ी सियासी हलचल: मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी पर संकट, इस्तीफे के सवाल पर तोड़ी चुप्पी

पटना, 16 जून (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर नया संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बिना विधायक (एमएलए) या विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बने दोबारा मंत्री पद की शपथ लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। इस बीच मंगलवार को मंत्री दीपक प्रकाश ने पहली बार पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी।पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान दीपक प्रकाश ने कहा कि उन्हें अभी तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे इस मामले की जानकारी केवल मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली है।

जब आधिकारिक तौर पर नोटिस मिलेगा, तब मैं इस पर विस्तार से अपनी बात रखूंगा। ”मंत्री पद से इस्तीफे की अटकलों पर भी उन्होंने सावधानीपूर्वक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह मंत्री हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। आगे की किसी भी राजनीतिक या संवैधानिक स्थिति पर फैसला एनडीए का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। विवाद की जड़ दीपक प्रकाश का लगातार दूसरी बार मंत्री बनना है। वह नवंबर 2025 में बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री नियुक्त किए गए थे और लगभग पांच महीने तक पद पर रहे।

इसके बाद अप्रैल 2026 में नई सरकार के गठन के दौरान उन्होंने फिर से पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली। दोनों कार्यकालों के बीच करीब 22 दिनों का अंतर रहा। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 164(4) की भावना के विपरीत है। उनका तर्क है कि बिना सदन का सदस्य बने मंत्री पद संभालने के लिए छह माह की जो संवैधानिक छूट दी गई है, उसका लाभ एक ही बार लिया जा सकता है। इसे कृत्रिम अंतराल देकर दोबारा लागू नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत ने याचिका में उठाए गए सवालों को गंभीर माना, तो बिहार सरकार और मंत्री दीपक प्रकाश के लिए यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक चुनौती बन सकता है।

Releated Posts

चीनी मिल बंद, ओवरब्रिज अधूरा: समस्तीपुर में विकास को लेकर उबाल, 25 अक्टूबर को होगा पदयात्रा आंदोलन

समस्तीपुर, 18 अक्टूबर (हर्षिता “अश्क”) जिले में विकास की रफ्तार को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद होने…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 18, 2026

पटना समेत पूरे बिहार में दुर्गापूजा का महाकुंभ: 16,800 प्रतिमाओं पर कड़ा पहरा, 25 हजार जवानों ने संभाला मोर्चा

पटना, 18 अक्टूबर (अविनाश कुमार) मां दुर्गा के पट खुलते ही राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में दुर्गापूजा…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 18, 2026

शिक्षक-स्नातक चुनाव में राजद ने फूंका बिगुल, एक मंच से डॉ. संजीव और दिलीप कुमार का एनडीए पर हमला

नालंदा, 18 अक्टूबर (अविनाश पांडेय) पटना शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 18, 2026

दशहरा से पहले बक्सर में सुरक्षा शो: सड़कों पर उतरी पुलिस, किला मैदान में रावण वध की तैयारियों का भी लिया जायजा

बक्सर, 17 अक्टूबर (विक्रांत) आगामी दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने को लेकर…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 17, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top