पटना, 12 जून (अविनाश कुमार) बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को मुंगेर के तारापुर और अरवल से पकड़ा गया है। इस कार्रवाई के साथ ही भर्ती घोटाले में जेल भेजे गए लोगों की संख्या लगभग 100 पहुंच गई है।जांच में सामने आया है कि परीक्षा माफिया बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से असली अभ्यर्थियों की जगह मेधावी छात्रों, यानी स्कॉलर्स, को परीक्षा में बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे थे। इसके लिए अभ्यर्थियों से 3 से 5 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

वहीं परीक्षा देने वाले स्कॉलर्स को 1 से 2 लाख रुपये का भुगतान किया जाता था। सूत्रों के अनुसार, गिरोह मूल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड में फोटो बदलकर स्कॉलर को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाता था। इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन में भी सेटिंग कर उन्हें प्रवेश दिलाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में शामिल बायोमेट्रिक कर्मियों को भी करीब एक लाख रुपये दिए जाते थे। बताया जाता है कि बिहार सहित अन्य राज्यों के दलाल कोचिंग संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षा केंद्रों के आसपास सक्रिय रहते थे और छात्रों को इस गिरोह से जोड़ने का काम करते थे।मामले का खुलासा उस समय हुआ जब केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान फोटो, हस्ताक्षर, पैराग्राफ राइटिंग और बायोमेट्रिक मिलान में भारी गड़बड़ियां सामने आई।

जांच में 563 अभ्यर्थियों के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद 7 अप्रैल 2025 को सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह प्राथमिकी केंद्रीय चयन पर्षद की प्राथमिकी शाखा की प्रभारी एसआई अमृता प्रियदर्शनी के आवेदन पर दर्ज हुई थी। पुलिस इस मामले की जांच धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और बिहार लोक परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कर रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल पूरे नेटवर्क की पहचान की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

















