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आपातकालीन सेवा पर संकट: डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा अनुमंडलीय अस्पताल, जख्म प्रतिवेदन बनाना भी बना चुनौती

बक्सर, 11 जून (विक्रांत) सात प्रखंडों के लाखों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले अनुमंडलीय अस्पताल डुमरांव में चिकित्सकों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था इन दिनों ‘जोड़-घटाव’ की गणित पर चल रही है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर न केवल ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है, बल्कि पुलिस प्रशासन को उपलब्ध कराए जाने वाले जख्म प्रतिवेदन (इंजरी रिपोर्ट) तैयार करने में भी गंभीर परेशानी उत्पन्न हो गई है।60 बेड वाले इस अनुमंडलीय अस्पताल में वर्तमान समय में कुल नौ पुरुष चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें पांच सामान्य एमबीबीएस चिकित्सक, दो विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सुमन सौरभ एवं डॉ. लोकेश कुमार तथा दो आयुष चिकित्सक शामिल हैं।

वहीं अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी सहित कुल तीन महिला चिकित्सक पदस्थापित हैं। लेकिन आपातकालीन एवं ओपीडी सेवाओं का पूरा भार महज पांच सामान्य एमबीबीएस चिकित्सकों के कंधों पर है।स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन को दोनों आयुष चिकित्सकों से भी आपातकालीन सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। हालांकि आयुष चिकित्सकों की सेवाएं लेने के बाद जख्म प्रतिवेदन तैयार करने को लेकर कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं सामने आ रही हैं। दूसरी ओर विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा महिला चिकित्सकों से नियमित आपातकालीन ड्यूटी नहीं ली जाती, जिससे उपलब्ध डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार रात्रिकालीन ड्यूटी और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में महिला चिकित्सकों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि ड्यूटी प्रबंधन में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के कारण आयुष चिकित्सकों से आपातकालीन सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। कई बार इससे विषम परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों से आपातकालीन सेवा लेने का विभागीय प्रावधान नहीं है। आयुष चिकित्सकों द्वारा जख्म प्रतिवेदन तैयार किए जाने के मुद्दे पर सिविल सर्जन से मार्गदर्शन मांगा गया है। अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान निकलेगा।

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