बक्सर, 28 मई (विक्रांत) जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण मामलों के निष्पादन में लापरवाही और मैनुअल स्कैवेंजिंग की घटना पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को समाहरणालय परिसर स्थित कार्यालय कक्ष में जिला पदाधिकारी श्रीमती साहिला की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं सतर्कता समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।बैठक के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति व्यवहार न्यायालय, बक्सर के लंबित मामलों की समीक्षा की गई।

समीक्षा में सामने आया कि 25 मामले स्पीडी ट्रायल के लिए लंबित हैं और मामलों के निष्पादन की रफ्तार बेहद धीमी है। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए अनुसंधान पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों की गवाही हर हाल में सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 69 पीड़ितों को 49.69 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 42 नए मामले प्राप्त हुए हैं, जिनमें भुगतान की प्रक्रिया जारी है। हत्या से जुड़े पांच मामलों में मृतकों के आश्रितों को कार्यालय परिचारी के पद पर नियुक्त किया गया है, जबकि तीन मामलों में प्रक्रिया जारी है।

बैठक में सिकरौल में मैनुअल स्कैवेंजिंग की घटना का मामला भी उठा। इस पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी एवं अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया। साथ ही मानसून को देखते हुए सभी प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को सफाई व्यवस्था की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।नगर परिषद बक्सर के कार्यपालक पदाधिकारी की अनुपस्थिति पर डीएम ने स्पष्टीकरण तलब किया। बैठक में पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

















