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मुझसे कैसे जाँ संभाली जाएगी

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, बलरामपुर से सुप्रसिद्ध कवयित्री ममता गुप्ता “नाज़” जी की एक ग़ज़ल

हूक दिल में ही दबा ली जाएगी।

अब तमन्ना में न ढाली जाएगी।

इतनी उल्फ़त आप जो वारोगे तो,

मुझसे कैसे जाँ संभाली जाएगी।

दिल में मुद्दत से भटकती थी जो बात,

अब वो होंटों पर सजा ली जाएगी।

दफ़्न करने के लिए सब ख़्वाहिशें,

ग़म की इक दुनिया बसा ली जाएगी।

और क्या होगा तेरे जाने के बाद,

मेरी मय्यत ही निकाली जाएगी।

जानती थी मेरी दुनिया लूट कर,

इक नयी दुनिया बसा ली जाएगी।

इक तेरे दीदार की हसरत लिए,

आज भी ये शाम ख़ाली जाएगी।

बेवफ़ाई है चलन जो इश्क़ का,

रस्म इक ये भी निभा ली जाएगी।

“नाज़” तेरे हिज्र की बख़्शिश है ये,

अब कहाँ आँखों से लाली जाएगी।

~ ममता गुप्ता “नाज़”

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