आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, रीवा से सुप्रसिद्ध कवि संगीत पाण्डेय जी की एक ग़ज़ल

ता उम्र यूँ ही क़ल्ब पे तारी रहेगा इश्क़।
जब तक कि मिट न जाएँगे जारी रहेगा इश्क़
सोचा नहीं था हमने कभी भी कि इस क़दर,
हर पल हमारी जान पे भारी रहेगा इश्क़।
करना पड़ेगा सारा नकद में हमें हिसाब,
कब तक किसी पे और उधारी रहेगा इश्क़।
शामिल कहाँ से रूह में हो पाएगा अगर,
बन कर के हुस्न का यूँ पुजारी रहेगा इश्क़।
गुज़रेगा जितनी बार कड़े इम्तिहान से,
उताना ही आगे चल के मे’यारी रहेग इश्क़
~ संगीत पाण्डेय


















