पटना, 15 मई (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने शुक्रवार को प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 15 अधिकारियों का तबादला कर दिया। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के बाद नौकरशाही गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कई को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर नए विभागों की कमान सौंपी गई है। सरकार ने गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया है।

साथ ही उन्हें पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसके बाद एच.आर. श्रीनिवास को इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।कोसी प्रमंडल के आयुक्त राजेश कुमार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) का प्रधान सचिव बनाया गया है। वहीं पथ निर्माण विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पंकज कुमार पाल को अब विभाग का पूर्णकालिक सचिव नियुक्त किया गया है।प्रमंडलों में भी बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा को भागलपुर प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय को कोसी प्रमंडल के आयुक्त का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा गया है।

पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार को पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार मिला है। भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त अवनीश कुमार सिंह को खान एवं भू-तत्व विभाग में सचिव-सह-खान आयुक्त बनाया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय में भी नई तैनाती की गई है। श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर और गुंजन सिंह को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। इससे पहले खांडेकर पटना और गुंजन सिंह भोजपुर में उपविकास आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। नालंदा के उपविकास आयुक्त शुभम कुमार को पटना का नया डीडीसी बनाया गया है। वहीं जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिमांश शर्मा को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार ने कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभारों से भी मुक्त किया है। डॉ. बी. राजेंद्र से शिक्षा एवं खेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार वापस लेकर यह जिम्मेदारी अब विनोद सिंह गुंजियाल को दी गई है। वहीं दिवेश सेहरा और लोकेश कुमार सिंह को भी अतिरिक्त प्रभारों से मुक्त कर दिया गया है। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को सरकार की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।














