नई दिल्ली, 05 मई (अशोक “अश्क”) देश की न्याय व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 33 जज और एक मुख्य न्यायाधीश कार्यरत हैं। जजों की संख्या में चार की वृद्धि के लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा।

संसद की मंजूरी मिलते ही यह बदलाव लागू हो जाएगा।इस फैसले को न्यायपालिका के इतिहास में एक अहम कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। वर्ष 1956 में जब “सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश संख्या अधिनियम” लागू हुआ था, तब मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों का प्रावधान था। इसके बाद 1960 में संख्या 13, फिर 17 और 1986 में बढ़ाकर 25 कर दी गई।हाल के वर्षों में भी इस दिशा में लगातार कदम उठाए गए हैं। 2009 में जजों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 की गई थी। इसके बाद 2019 में एक और संशोधन के जरिए इसे 33 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) तक बढ़ाया गया।

अब 2026 में एक बार फिर संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कम होगा और न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। बढ़ती जनसंख्या और मुकदमों की संख्या को देखते हुए यह कदम समय की जरूरत भी माना जा रहा है।सरकार के इस फैसले से आम जनता को जल्द और प्रभावी न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

















