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मेरी ग़ज़लों में नहीं यूँ ही असर आया है

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, रीवा के सुप्रसिद्ध कवि संगीत पाण्डेय जी की एक ग़ज़ल

दिल में जितना भी था सब दर्द उतर आया है।

मेरी ग़ज़लों में नहीं यूँ ही असर आया है।

खाई हैं ठोकरें ता-उम्र ज़माने भर की,

तब कहीं जा के सँभलने का हुनर आया है।

बढ़ रही टीस अचानक से लगे है ऐसा,

क़ल्ब में ज़ख़्म कोई ताज़ा उभर आया है।

झाँक कर देखा कभी मैंने जो ख़ुद के अंदर,

दूर तक एक बयाबान नज़र आया है।

एक मुद्दत से लगातार हुआ है घायल,

दिल नहीं यूँ ही बग़ावत पे उतर आया है

~ संगीत पाण्डेय

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