आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता सिंह “वफ़ा” जी की एक ग़ज़ल

रंग-ए-वहशत को दिखाती हैं तुम्हारी यादें !
दर्द-ए-अहसास जगाती हैं तुम्हारी यादें !
जश्न-ए-तन्हाई मनाती हैं तुम्हारी यादें !
वस्ल का ख्वाब सजाती हैं तुम्हारी यादें !
सा’अते दर्द ने छीने हैं सभी होशो हवास,
अश्क का दरिया बहाती हैं तुम्हारी यादें !
प्यास जब जब भी गई ले के सराबों में मुझे,
तिश्नगी मेरी बुझाती हैं तुम्हारी यादें !
अब असीरी में नहीँ कटती हैं रातें तन्हा,
ख्वाब में साथ निभाती हैं तुम्हारी यादें !
जब ज़मीं मिलती है सूरज से कहीँ दूर कहीँ,
मुझको दीवाना बनाती हैं तुम्हारी यादें !
जब भी जख़्मों की मसीहाई का सोचा है ‘वफ़ा’,
इस पे नश्तर सा चलाती हैं तुम्हारी यादें !
~ कविता सिंह “वफ़ा”

















