Image

मधुमास

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में बिहार, बेगूसराय की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. सुनीता ‘सुमन’ जी की एक कविता

एक अकुलाहट सी रहती है

कि खोल के मन के पन्ने

उकेरूँ कुछ अहसास,

तहों में दबा मुखर हो जाए

मन का सुवास,

और पुरवा के संग उड़ जाने दूँ

उस ओर जहाँ जहाँ

वृतों में घिरे तुम अकुला रहे होवो,

फिर छू कर उड़े

पूरवा उस ओर जहाँ मिलती हैं

तमाम नदियाँ अपने सागर से

कुछ पल ठिठक कर

देखे वो अनुपम नज़ारा

और ले सीख ,कि

बँधकर वृतों में

नहीं जीना उसे

लेकर उपनामों की भीख,

वो बेखौफ़, बेपरवाह

उड़ जाने को उद्धत

रचे अपने लिए शब्दों का संसार,

निर्माणरत, निर्भय रचे अपने लिए

अपने सपनों का संसार,

जहाँ चतुर्दिक हो हास

गुंजायमान हो परिहास

फैला हो दूर तक सुहास,

जहाँ न हो कोई उच्छ्वास

ठहर कर रह जाए मधुमास

~ डॉ. सुनीता ‘सुमन’

Releated Posts

कल रात ‘अश्क’ अपने ही साये से डर गया

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से अशोक “”अश्क” की एक ग़ज़ल रखता नहीं खबर कि…

मुझसे कैसे जाँ संभाली जाएगी

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, बलरामपुर से सुप्रसिद्ध कवयित्री ममता गुप्ता “नाज़” जी की एक…

माँ

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में तमिलनाडु, चेन्नई से सुप्रसिद्ध कवयित्री शिल्पा जैन जी की एक गीत तेरी…

क़ामयाबी के नुस्ख़े नए मिल गए

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, उज्जैन से सुप्रसिद्ध कवि सीआर के जैन “राकेश” जी की एक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top