Image

अल्फ़ाज़ बोल उठ्ठे

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में राजस्थान, जोधपुर की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ मधुबाला श्रीवास्तव (“मधू जोधपुरी”) जी की एक ग़ज़ल

उठने लगे क़दम फिर, क्यूँ, मेरे बेख़ुदी।

में ये कौन खींच लाया है, फिर से ज़िन्दगी में।

रहती है फ़िक्र तेरी ,ऐ यार मुझको हरदम,

क्यूँ शर्त ऐसी रख्खी,है तुमने दोस्ती में।

ये किसकी आहटों पे, है बेक़रार दिल यूँ,

किसने है सुर को बाँधा ,इस दिल की बांसुरी में।

हासिल अगर है तू तो ,फिर चाहत-ए-जहाँ क्या,

जन्नत मुझे मिली है ,जब तेरी आशिक़ी में।

ऐसा गुमाँ हुआ था , अल्फ़ाज़ बोल उठ्ठे,

लिक्खा था तुमको मैंने,जब अपनी शायरी में।

ठहरी हुई है जैसे परवाज़-ए-फ़िक्र मेरी,

जब से बसा है चेहरा, इस दिल की कोठरी में।

क्या-क्या न फ़ाश होते ,तब राज़ ए दिल हमारे,

गर झाँकते कभी तुम, इस दिल की ख़ामुशी में।

पा कर तेरे करम से अंदाज़-ए-बंदगी ये,

झुकता है सर “मधू”, का, तेरी ही बंदगी में

~ डॉ मधुबाला श्रीवास्तव (“मधू जोधपुरी”)

Releated Posts

कल रात ‘अश्क’ अपने ही साये से डर गया

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से अशोक “”अश्क” की एक ग़ज़ल रखता नहीं खबर कि…

मुझसे कैसे जाँ संभाली जाएगी

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, बलरामपुर से सुप्रसिद्ध कवयित्री ममता गुप्ता “नाज़” जी की एक…

माँ

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में तमिलनाडु, चेन्नई से सुप्रसिद्ध कवयित्री शिल्पा जैन जी की एक गीत तेरी…

क़ामयाबी के नुस्ख़े नए मिल गए

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, उज्जैन से सुप्रसिद्ध कवि सीआर के जैन “राकेश” जी की एक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top