पटना, 06 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार में लागू शराबबंदी कानून के दस साल पूरे होने के बाद भी इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राज्य की राजनीति में एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए शराबबंदी को पूरी तरह विफल बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने विस्तृत बयान में उन्होंने सरकार से सीधे जवाब की मांग की है।

तेजस्वी यादव ने पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि राज्य में शराबबंदी सख्ती से लागू है, तो हर महीने लाखों लीटर शराब आखिर कहां से बरामद हो रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2026 में हर महीने औसतन 3,70,684 लीटर अवैध शराब जब्त की गई, जो प्रतिदिन करीब 12,356 लीटर होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या शराब पैराशूट से गिराई जा रही है?” उनका कहना है कि ये सिर्फ सरकारी आंकड़े हैं, जबकि वास्तविक खपत इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दस वर्षों में यह कानून अपने उद्देश्य पूरे करने में नाकाम रहा है।

तेजस्वी के अनुसार प्रशासन और शराब माफिया के बीच कथित सांठगांठ ने इस कानून को खोखला बना दिया है। उन्होंने इसे “संस्थागत भ्रष्टाचार” करार देते हुए दावा किया कि शराबबंदी के कारण राज्य में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो चुकी है। आंकड़ों के जरिए हमला तेज करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद अब तक 11 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 16 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद 5 करोड़ लीटर से अधिक शराब की जब्ती यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर शराब की उपलब्धता बनी हुई है। तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस कानून के नाम पर गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असली तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों में किसी भी बड़े पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस मुद्दे ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में बहस को तेज कर दिया है।















