पटना, 04 अप्रैल (अविनाश कुमार) राजधानी पटना में रसोई गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने छात्रों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। एजुकेशनल हब माने जाने वाले मुसल्लहपुर हाट, बोरिंग रोड, महेंद्रू और टिकियाटोली जैसे इलाकों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि छात्रावासों की रसोई लगभग ठप पड़ गई है। गैस के दाम 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि 90 फीसदी लॉज और छात्रावासों में नाश्ता बंद कर दिया गया है।

महिला छात्रावासों में भी केवल रेडीमेड खाद्य पदार्थों से काम चलाया जा रहा है। दिन-रात के भोजन में रोटी गायब हो चुकी है और सिर्फ चावल परोसा जा रहा है। कई जगहों पर इंडक्शन चूल्हे और हीटर पर खाना बनाने की मजबूरी साफ देखी जा रही है। गैस संकट का सबसे ज्यादा असर पटना विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रावासों में देखने को मिल रहा है। यहां तक कि सरकारी छात्रावासों के प्रिंसिपल भी सिलेंडर की कमी से परेशान हैं। समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों में रहने वाले छात्र खुद खाना बनाने को मजबूर हैं, लेकिन गैस नहीं मिलने से अब वे हीटर और वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं।

बोरिंग रोड इलाके के कई निजी छात्रावासों में पहले ब्लैक में सिलेंडर उपलब्ध हो जाता था, लेकिन अब वहां भी सप्लाई ठप है। नतीजतन कुछ जगहों पर मिट्टी के चूल्हे जलने लगे हैं। छात्र-छात्राएं बिस्कुट, नमकीन और भूजा जैसे सस्ते विकल्पों पर निर्भर हो गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई छात्र घर लौट चुके हैं और खर्च के डर से वापस नहीं आ रहे। उधर, छात्रावास संचालकों ने बढ़ती लागत का हवाला देकर बेड चार्ज बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं, जिससे संकट और गहराने की आशंका है।














