पटना, 31 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार में राजस्व कर्मियों की करीब दो महीने से चल रही हड़ताल पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते ही बड़ा असर देखने को मिला। विजय कुमार सिन्हा के निर्देश के बाद कार्रवाई शुरू होते ही महज कुछ घंटों में 30 अधिकारी काम पर लौट आए, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

दरअसल, बिहार लोक सेवा आयोग की 69वीं बैच के 69 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों को विभाग की ओर से स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनकी नौकरी तक जा सकती है। इस सख्ती का असर तत्काल दिखा और शाम होते-होते 30 अधिकारी अपनी ड्यूटी पर वापस लौट आए।सरकार ने शेष 39 अधिकारियों को 31 मार्च तक का अंतिम मौका दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक कहा कि तय समय सीमा तक काम पर नहीं लौटने वालों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई तय है।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, इन अधिकारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश अवैध घोषित किया गया है और इसे सेवा अवधि में नहीं गिना जाएगा। विभाग ने इसे बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 का उल्लंघन भी बताया है।सरकार ने साफ किया है कि 1 अप्रैल से राज्य के सभी अंचलों में राजस्व सेवाएं पूरी तरह सुचारू रहेंगी। दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी और भूमि विवाद जैसे कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। फिलहाल 563 राजस्व अधिकारी पहले से ही कार्यरत हैं।विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जनता के हितों से कोई समझौता नहीं होगा और अनुशासन तोड़ने वालों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। साथ ही अराजकता फैलाने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।सरकार के इस एक्शन से साफ संकेत मिल गया है कि अब हड़ताल की राजनीति पर सख्ती भारी पड़ने वाली है।














