पटना, 07 जुलाई (पटना डेस्क) बिहार में सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने पथ निर्माण विभाग के माध्यम से राज्य की गारंटी पर विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 21 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस फैसले के साथ ही वर्षों से फंड के अभाव में धीमी पड़ी सड़क और पुल परियोजनाओं को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। खासकर मुजफ्फरपुर सहित पूरे उत्तर बिहार में विकास कार्यों की गति तेज होने जा रही है।सरकार के अनुसार, स्वीकृत राशि में 15 हजार करोड़ रुपये बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) तथा 6 हजार करोड़ रुपये बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को उपलब्ध कराए जाएंगे।

पथ निर्माण विभाग ने इस संबंध में औपचारिक संकल्प जारी कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश और शर्तों से अवगत करा दिया है। सरकार ने ऋण चुकाने के लिए अधिकतम 25 वर्ष की समय-सीमा तय की है। इसकी अदायगी ‘बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली-2026’ के तहत सड़कों और पुलों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स की आय से की जाएगी। विभाग का दावा है कि इस वित्तीय व्यवस्था से अब धन की कमी के कारण कोई भी महत्वपूर्ण परियोजना अधर में नहीं लटकेगी। इस मेगा फंड का सबसे बड़ा लाभ मुजफ्फरपुर को मिलने वाला है। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले अखाड़ाघाट पुल के नए निर्माण, दादर पुल के पुनर्निर्माण तथा मौजूदा दादर पुल और व्यस्त माड़ीपुर आरओबी की मरम्मत का कार्य अब तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

इससे शहर में वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, पारू प्रखंड के फतेहाबाद में बूढ़ी गंडक नदी पर लगभग 5 अरब रुपये की लागत से प्रस्तावित तीन किलोमीटर लंबे महासेतु के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। इसके अलावा करीब 8 अरब रुपये की लागत वाली हथौड़ी-अतरार-बभनगामा-औराई सड़क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले रैयतों को मुआवजा भुगतान में भी तेजी आएगी। सरकार को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक वित्तीय पैकेज से बिहार का सड़क नेटवर्क नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा और विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यदि चाहें, मैं इसे और अधिक फ्रंट पेज अखबारी शैली में और भी धारदार शीर्षक व उपशीर्षक के साथ तैयार कर सकता हूँ।














