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हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा राजगीर: दूसरे शाही स्नान में उमड़ा आस्था का सैलाब, बैतरणी घाट बना भक्तिमय धाम

नालंदा, 31 मई (अविनाश पांडेय) राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026 के तहत रविवार को बैतरणी घाट पर दूसरे शाही स्नान का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे अखाड़ों के साधु-संतों, महंतों और नागा साधुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पवित्र बैतरणी नदी में आस्था की डुबकी लगाई। शाही स्नान के दौरान घाट पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह होते ही बैतरणी घाट पर साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया।

अखाड़ों के संत पारंपरिक वेशभूषा, ध्वज-पताकाओं और धार्मिक प्रतीकों के साथ भव्य शोभा के रूप में घाट पहुंचे। शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। संतों ने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए पवित्र स्नान किया और राष्ट्र, समाज तथा विश्व कल्याण की मंगलकामना की। शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु सुबह से ही घाट पर पहुंचने लगे। संतों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।

श्रद्धालुओं ने भी बैतरणी नदी में स्नान कर धार्मिक पुण्य अर्जित किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।आस्था के इस विशाल समागम को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाट और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल, दंडाधिकारियों, एनडीआरएफ की टीमों और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेले क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी गई, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास के दौरान राजगीर के पवित्र कुंडों और नदियों में स्नान करने से विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। दूसरे शाही स्नान के दौरान उमड़ी विशाल भीड़ और संतों की भव्य उपस्थिति ने राजगीर की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया। यह आयोजन श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर यादगार साबित हुआ।

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