बक्सर, 15 मई (विक्रांत) भागलपुर स्थित बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर में शुक्रवार को सामाजिक विज्ञान अनुसंधान पर आधारित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। 15 मई 2026 से शुरू हुई इस कार्यशाला में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के विद्यार्थियों को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों और समकालीन शोध दृष्टिकोणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य युवा शोधार्थियों को कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक सोच से लैस करना है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार कृषि महाविद्यालय की एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. रूबी रानी तथा कॉलेज ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, सबौर के एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य डॉ. एम.के. वाधवानी मौजूद रहे। दोनों अतिथियों ने कहा कि बदलते कृषि परिवेश में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और गुणवत्तापूर्ण शोध ही ग्रामीण विकास की नई दिशा तय करेगा।कार्यक्रम की शुरुआत कृषि प्रसार शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. आदित्य सिन्हा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि शोध में दृढ़ता, आलोचनात्मक चिंतन और अंतःविषयक दृष्टिकोण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को अनुसंधान डिजाइन, सैंपलिंग, डेटा संग्रहण, शोध समस्या निर्माण तथा अकादमिक लेखन के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।

पहले दिन सामाजिक विज्ञान अनुसंधान का परिचय, अनुसंधान डिजाइन, मापन स्तर, सैंपलिंग तकनीक, डेटा संग्रहण विधियां और परिकल्पना निर्माण जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। विभागीय संकाय सदस्यों ने प्रतिभागियों के साथ विस्तृत संवाद भी किया। कार्यशाला में विभिन्न सामाजिक विज्ञान विषयों से जुड़े 38 शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आगामी दो दिनों में साहित्य समीक्षा, शोध नैतिकता, गुणात्मक अनुसंधान, शोध प्रबंध लेखन तथा शोध प्रस्ताव विकास पर गहन सत्र आयोजित किए जाएंगे।















