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समस्तीपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव: जिला प्रशासन की ऐतिहासिक पहल, प्रखंड स्तर पर मिलेगा प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार

समस्तीपुर, 20 जुलाई (हर्षिता “अश्क”) समस्तीपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा के मार्गदर्शन में जिला स्वास्थ्य समिति ने स्वास्थ्य संस्थानों के प्रशासनिक एवं वित्तीय पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस निर्णय को जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों बाद होने वाले सबसे बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 के बाद जिले के छह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) को उत्क्रमित कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का दर्जा तो दे दिया गया था, लेकिन उनके अनुरूप प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों का पुनर्गठन नहीं किया गया।

इसका असर स्वास्थ्य योजनाओं के संचालन, बजट व्यय, मानव संसाधन प्रबंधन, दवा एवं चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और दैनिक प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार इस समस्या को उठाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल आवश्यक पहल की। इसके बाद जिला स्वास्थ्य समिति ने पुनर्गठन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी। नई व्यवस्था के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खानपुर, विद्यापतिनगर, मोहनपुर और बिथान तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवाजीनगर, ताजपुर और पटोरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को उनके प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत संचालित सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों का आहरण एवं संवितरण पदाधिकारी (डीडीओ) सहित आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्रदान किए जाएंगे।

प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों का संचालन अधिक विकेंद्रीकृत और प्रभावी होगा। प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी, वित्तीय कार्य समय पर पूरे होंगे और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता के साथ जवाबदेही भी बढ़ेगी। साथ ही दवा आपूर्ति, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कर्मचारियों के प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का कहना है कि यह पुनर्गठन केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक दूरगामी कदम साबित होगा, जिससे आने वाले समय में लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

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