समस्तीपुर, 08 सितम्बर (हर्षिता “अश्क”) जिले में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान को पूरी ताकत से तेज कर दिया है। जिले में वर्तमान में 2,33,212 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षित आवागमन, आश्रय और पशुओं के लिए जरूरी संसाधन पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों की टीमें लगातार मैदान में डटी हैं। प्रशासन का दावा है कि किसी भी प्रभावित परिवार को जरूरत के समय सहायता से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 81 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।

इन रसोइयों से सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन करीब 65 हजार लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमित उपलब्धता पर अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं, ताकि बाढ़ के बीच किसी व्यक्ति को भोजन के लिए परेशानी न हो।जलजमाव और बारिश से प्रभावित परिवारों को तत्काल आश्रय देने के लिए अब तक 32,515 पॉलिथीन शीट बांटी जा चुकी हैं। जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त शीट और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 18 मेडिकल कैंप सक्रिय हैं। यहां लोगों को चिकित्सकीय परामर्श, जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में भ्रमण कर मरीजों की जरूरत का आकलन करते हुए चिकित्सा सुविधा पहुंचा रही हैं। बाढ़ में पशुधन की सुरक्षा के लिए 17 पशु कैंप और शेड संचालित किए जा रहे हैं। पशुओं के लिए अब तक 490 क्विंटल चारा और भूसा वितरित किया जा चुका है।

वहीं, 17 पशु चिकित्सा कैंपों में अब तक 290 पशुओं को दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है। 201 नावें संभाल रहीं राहत की कमान तीनों प्रभावित प्रखंडों में लोगों के आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 201 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनके माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य जारी है।

जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर समस्याओं का त्वरित समाधान करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति और परिवार तक समय पर राहत पहुंचाना तथा किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना है।














