
समस्तीपुर, 07 सितम्बर (हर्षिता “अश्क”) जिले के बाढ़ प्रभावित मोहनपुर, हसनपुर और विद्यापतिनगर प्रखंडों में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। तीनों प्रखंडों में करीब 2,33,212 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। संकट की इस घड़ी में जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सुविधा और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए तीनों प्रखंडों में 58 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं।
इन रसोइयों के माध्यम से अब तक करीब 25,858 लोगों को भोजन कराया जा चुका है। प्रशासन की ओर से रसोइयों में स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं, बारिश से बचाव और अस्थायी आश्रय के लिए अब तक 31,398 पॉलिथीन शीट वितरित की जा चुकी हैं। 18 मेडिकल कैंप, इलाज-दवा की व्यवस्था बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए 18 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। इन शिविरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित इलाकों में लगातार सक्रिय रहने और जरूरत के मुताबिक तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ में फंसे पशुओं की सुरक्षा के लिए 17 पशु राहत एवं शेड कैंप बनाए गए हैं। पशुओं के लिए अब तक 216 क्विंटल भूसा और चारा वितरित किया जा चुका है। साथ ही 17 पशु चिकित्सा कैंप संचालित हैं, जहां अब तक 264 पशुओं को उपचार और दवा दी जा चुकी है।

पशु चिकित्सा दल प्रभावित इलाकों में लगातार भ्रमण कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कुल 192 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनके जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति भी की जा रही है। प्रशासन लगातार जलस्तर और हालात पर नजर रखते हुए जरूरत के अनुसार राहत अभियान को और तेज कर रहा है।

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के दौरान प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन अथवा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की अपील की गई है।














