पटना, 13 जून (अविनाश कुमार) बिहार में आरक्षण व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बड़े बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तथा जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ाना है। इसी सोच के तहत सरकार ने ओबीसी वर्ग में क्रीमी लेयर व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है, उन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का पूरा लाभ मिलता रहेगा, जबकि इससे अधिक आय वाले परिवार इस सुविधा के पात्र नहीं होंगे। सम्राट चौधरी ने कहा कि आरक्षण केवल जातिगत आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखकर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं, उन्हें बार-बार आरक्षण का लाभ लेने के बजाय समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आगे बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आय सीमा निर्धारित है।

सवर्ण वर्ग के ऐसे परिवार जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक है, उन्हें ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि पात्र गरीब परिवारों को इसका लाभ दिया जाता है।उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसी वर्ग के अधिकारों में कटौती करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं आम जनता के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।














