पटना, 21 जून (पटना डेस्क) भोजपुर जिले के शाहपुर में 17 जून को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। एक ओर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी दल सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (यू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। वायरल वीडियो वर्ष 2023 का बताया जा रहा है। इसमें नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के संदर्भ में कानून-व्यवस्था पर अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में वह कथित ‘इंस्टेंट जस्टिस’ की अवधारणा का विरोध करते हुए कहते हैं कि अपराधियों को मार देना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का तरीका नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि किसी भी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत करती है और संविधान के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उधर, भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने रविवार को शाहपुर जाकर मृतक के परिजनों से मिलने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पार्टी की ओर से एक जांच समिति का गठन भी किया गया है।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई और राज्य में पहले भी जातीय आधार पर कई फर्जी एनकाउंटर के मामले सामने आ चुके हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब सरकार स्वयं जांच की बात कर रही है, तो फिर मृतक के माता-पिता और ग्रामीणों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की क्या आवश्यकता है। तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे के जरिए अन्य विवादित मामलों और कथित घोटालों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। भरत तिवारी एनकाउंटर अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।













