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बिहार सरकार का बड़ा फैसला: 38 जिलों में सवर्ण समाज के लिए तैनात होंगे विशेष नोडल अफसर, अब जिला स्तर पर होगा शिकायतों का त्वरित समाधान

पटना, 06 अगस्त (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने सवर्ण समाज से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान के लिए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के सभी 38 जिलों में सवर्ण समाज के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की तैनाती करने का फैसला किया है। इन अधिकारियों का मुख्य दायित्व सवर्ण समुदाय से जुड़े उत्पीड़न, भूमि विवाद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र से संबंधित समस्याओं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में आने वाली बाधाओं का शीघ्र समाधान करना होगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए बार-बार पटना स्थित राज्य सवर्ण आयोग के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पीड़ित सीधे अपने जिले में नियुक्त नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकेंगे।

ये अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ पदाधिकारी अथवा जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी होंगे, जो संबंधित विभागों और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। पूरे तंत्र की निगरानी संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) करेंगे। राज्य सवर्ण आयोग के पास लंबे समय से गरीब सवर्ण परिवारों की जमीन पर अवैध कब्जा, जातिसूचक अपमान, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनाने में कठिनाई और अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जुड़ी शिकायतें लगातार पहुंच रही थीं। सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त होने से ऐसे मामलों का तेजी से निस्तारण संभव हो सकेगा और पीड़ितों को समय पर राहत मिलेगी। योजना को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने सभी जिलों से नोडल अधिकारियों के नाम मांगे हैं। चयनित अधिकारियों को 10 अगस्त को पटना के तारामंडल सभागार में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में शिकायतों के निस्तारण, कानूनी प्रक्रियाओं, आयोग के दिशा-निर्देशों तथा संवेदनशील मामलों के समाधान के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। राज्य सवर्ण आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि नोडल अधिकारी सवर्ण समाज को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ उत्पीड़न से जुड़े मामलों में भी प्रभावी सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल आयोग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी, शिकायतों का समयबद्ध समाधान होगा और लोगों का सरकारी तंत्र पर विश्वास भी मजबूत होगा।

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