पटना,09 सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार में गंगा, गंडक, सोन, पुनपुन समेत नदियों के उफान ने खेती-किसानी की कमर तोड़ दी है। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन में 13 जिलों में करीब एक लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद होने की बात सामने आई है। पटना, भागलपुर, वैशाली और खगड़िया सबसे अधिक प्रभावित हैं। धान, मक्का, सब्जी और बागवानी की फसलें पानी में डूबकर नष्ट हो गई हैं।पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल के 77 प्रखंडों में फसल क्षति दर्ज की गई है। अकेले पटना में पुनपुन नदी ने 10,101 एकड़ फसल को नुकसान पहुंचाया है। कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल ने बताया कि पानी घटने के बाद जिला रिपोर्टों का सत्यापन किया जाएगा।

अंतिम आकलन के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।बाढ़ का दायरा भयावह बना हुआ है। 14 जिलों की 491 ग्राम पंचायतों में 35.89 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मंगलवार तक गंगा स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। पंडारक और सुल्तानगंज में नदी उच्चतम स्तर को पार कर गई। घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और सोन भी खतरे के ऊपर हैं। भागलपुर में एनएच-80 पर तीन फीट पानी भरने से यातायात ठप है, जबकि मोकामा में भी स्थिति गंभीर है। 14 जिलों में 600 से अधिक ग्रामीण सड़कें जलमग्न हैं। पटना में 90, वैशाली में 80, सारण में 78 और भागलपुर में 62 सड़कें प्रभावित हैं। पानी उतरते ही मरम्मत शुरू करने का निर्देश इंजीनियरों को दिया गया है।

कुछ इलाकों में पानी घट रहा है, लेकिन अब कीचड़, सड़ती फसल और जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर में चार से पांच फीट पानी है। मुंगेर में राहत की मांग को लेकर वार्ड 41 के लोगों ने मुख्य मार्ग तीन घंटे जाम किया। पश्चिम चंपारण में ग्रामीणों ने नावों से जल सत्याग्रह कर सात किलोमीटर मार्च निकाला।सरकार 1,876 नावें चला रही है। 432 सामुदायिक रसोइयों से 10 लाख से अधिक लोगों को भोजन और 14 राहत शिविरों में 12,068 लोगों को आश्रय दिया जा रहा है।













