बक्सर, 02 सितम्बर (विक्रांत) बदलते जलवायु और कृषि परिस्थितियों के बीच किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में विश्व नारियल दिवस समारोह-2026 का भव्य आयोजन किया गया। नारियल विकास बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय पटना और भा.कृ.अ.प.-अखिल भारतीय समन्वित रोपण फसल अनुसंधान परियोजना, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में नारियल की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन तकनीक, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन पर विस्तार से चर्चा हुई।

इस वर्ष समारोह की थीम “अनिश्चितता के दौर में नारियल : खाद्य, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” रही। कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों-अधिकारियों और नारियल विकास बोर्ड की टीम ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बताया गया कि विश्व नारियल दिवस अंतर्राष्ट्रीय नारियल समुदाय की स्थापना की स्मृति में मनाया जाता है, जिसकी स्थापना 1969 में हुई थी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि कृषि विविधीकरण और बहुउपयोगी फसलों को बढ़ावा देना समय की मांग है। नारियल खाद्य, पेय, तेल, औषधि और सौंदर्य प्रसाधन सहित अनेक क्षेत्रों में उपयोगी है। उन्होंने उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर विपणन को जोड़ने पर जोर दिया, ताकि किसानों को अधिक मूल्य और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मिल सके।

विशेष अतिथि निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने वैज्ञानिक खेती, आधुनिक तकनीक और नारियल आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की अपील की। डॉ. रूबी रानी और वरिष्ठ वैज्ञानिक श्रीमती अनिता कुमारी ने उत्पादन प्रबंधन, प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान पर जानकारी दी।

समारोह में नारियल आधारित उत्पादों और नवाचारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। नारियल विकास बोर्ड की निदेशक श्रीमती जयश्री ए. के नेतृत्व में टीम तथा डॉ. डी.के. जायसवाल के समन्वय से आयोजित कार्यक्रम में किसानों और विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद हुआ।
















