बक्सर, 18 सितम्बर (विक्रांत) जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक तस्वीर ने मानवता और मृतकों के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम हाउस परिसर में एक व्यक्ति द्वारा कफन में लिपटे शव को कथित तौर पर घसीटकर अंदर ले जाने का वीडियो सामने आया है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।बताया जाता है कि 31 अगस्त 2026 को रेलवे पैदल पुल के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेजा।

वहां शव लेकर पहुंचे बिहारी कुमार नामक व्यक्ति ने उसे रिक्शे से उतारा और परिसर से पोस्टमार्टम कक्ष तक कफन में लिपटे शव को घसीटकर ले जाता दिखाई दिया।वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने जब बिहारी से इस तरह शव ले जाने की वजह पूछी तो उसने बताया कि शव उठाने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत होती है, लेकिन वह अकेले काम कर रहा था। उसका यह भी कहना था कि उसे मेहनताना काफी कम मिलता है। ऐसे में उसके पास शव को घसीटकर ले जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
मामले पर सिविल सर्जन डॉ. शिवकुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा कि बिहारी नाम का कोई व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग का कर्मी नहीं है। उनके अनुसार पोस्टमार्टम हाउस में शंकर नाम का व्यक्ति कार्यरत है। हालांकि उन्होंने मामले की जानकारी लेने की बात कही है।वहीं, जीआरपी थानाध्यक्ष ने बताया कि बिहारी उनके यहां काम करता है। उन्होंने कहा कि जीआरपी की ओर से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है और निजी स्तर पर किसी तरह शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया जाता है।

मेहनताना बढ़ाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके स्तर से निर्णय संभव नहीं है।घटना ने मृतकों के सम्मान और शवों के सुरक्षित व गरिमापूर्ण परिवहन की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद संबंधित जिम्मेदारी किसकी तय होती है।













