पटना, 11। सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों और दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई कर रहे प्रशिक्षु चिकित्सकों को बड़ी राहत दी है। स्वास्थ्य विभाग ने पीजी छात्रों के मासिक मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है। नई दरें एक जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी और चिकित्सकों को इसका लाभ पूर्व प्रभाव से मिलेगा। सरकार के इस फैसले से राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में अध्ययनरत पीजी चिकित्सकों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी बयान के अनुसार, पीजी के प्रथम वर्ष के छात्रों का मासिक मानदेय 82 हजार रुपये से बढ़ाकर 92,800 रुपये कर दिया गया है।

इसी तरह द्वितीय वर्ष के छात्रों को अब 90,200 रुपये के स्थान पर 1,02,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। तृतीय वर्ष के पीजी छात्रों का मानदेय भी 99,220 रुपये से बढ़ाकर 1,12,200 रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय से तीनों वर्ष के प्रशिक्षु चिकित्सकों के मानदेय में हजारों रुपये की मासिक बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि संशोधित दरों का लाभ जनवरी 2026 से मिलेगा, जिससे पात्र छात्रों को पूर्व प्रभाव से बढ़ी हुई राशि का भुगतान किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि पीजी छात्र भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मानदेय में बढ़ोतरी से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और चिकित्सा शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकीय मानव संसाधन को मजबूत करना भी है। प्रशिक्षित और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से राज्य के लोगों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।














