समस्तीपुर, 23 जून (हर्षिता “अश्क”) कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले पांच भाइयों का परिवार आज अपराध, मौत और बर्बादी की दर्दनाक कहानी बन चुका है। बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र स्थित आनंदगोलवा गांव का यह परिवार एक समय अपने बेटों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद करता था, लेकिन अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद परिवार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। ताजा घटनाक्रम में कुख्यात अपराधी ललन सिंह उर्फ लल्लन का उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस मुठभेड़ में अंत हो गया। ललन पर बिहार और उत्तर प्रदेश में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित कर रखा था।

परिजनों के अनुसार ललन और उसके भाई पढ़ाई के साथ कोचिंग सेंटर चलाते थे। लगातार असफलताओं के बाद उनका झुकाव अपराध की ओर बढ़ता गया। वर्ष 2016 में नालंदा में एक जमादार की हत्या कर उसकी सरकारी रिवॉल्वर लूटने की घटना से उनके आपराधिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद पटना और अन्य जिलों में पुलिसकर्मियों पर हमले कर हथियार लूटने की कई घटनाओं ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।वर्ष 2017 में नालंदा में कैश वैन लूट और पटना में करीब 60 लाख रुपये की लूट के दौरान तीन लोगों की हत्या ने पूरे बिहार को हिला दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने उनके घर से जमीन में छिपाकर रखे गए 45 लाख रुपये बरामद किए थे। इसके बाद परिवार के कई सदस्य गिरफ्तार किए गए। सितंबर 2017 में बाढ़ कोर्ट में पेशी के दौरान ललन, मनीष और रजनीश हाजत की खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे।

बाद में उत्तर प्रदेश को उन्होंने अपना ठिकाना बना लिया। वर्ष 2022 में मनीष और रजनीश वाराणसी में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। अब ललन के मारे जाने के बाद परिवार का तीसरा बेटा भी एनकाउंटर में खत्म हो गया है। वहीं चौथा भाई बबुआ सिंह हत्या और लूट के मामलों में जेल में बंद है, जबकि सबसे बड़ा भाई पत्थरु सिंह अपराध से दूर रहकर पंजाब में नौकरी कर रहा है। आज दिव्यांग माता-पिता शिवशंकर सिंह और रेशमी देवी गांव में अकेले जीवन बिता रहे हैं। कभी बेटों की सफलता के सपने देखने वाले इस परिवार के हिस्से अब सिर्फ बदनामी, दर्द और अंतहीन अकेलापन बचा है।















