बक्सर, 01 अप्रैल (विक्रांत) राजधानी पटना में बुधवार को संयुक्त श्रमिक संघ एवं किसान मोर्चा के आह्वान पर “काला दिवस” मनाया गया। मिलर स्कूल मैदान से नियोजन भवन तक निकाले गए विशाल जुलूस में सैकड़ों संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूर, किसान, खेत मजदूर, महिला कर्मी, आशा कार्यकर्ता और नौजवान शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारे लगाए जैसे “श्रम संहिता वापस लो”, “स्थायी रोजगार की गारंटी दो”, “एमएसपी को कानूनी दर्जा दो” और “निजीकरण व ठेका प्रथा बंद करो”। जुलूस नियोजन भवन के पास सभा में तब्दील हो गया।

सभा को संबोधित करते हुए एटक के महासचिव अजय कुमार ने नई श्रम संहिताओं को मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ करार दिया। उन्होंने स्थायी रोजगार, सम्मानजनक वेतन, समान काम के लिए समान वेतन, बोनस और ग्रेच्युटी लागू करने, ठेका प्रथा बंद करने और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने और निजीकरण की नीति पर कड़ा विरोध जताया।

आशा संघ के महासचिव कौशलेंद्र वर्मा ने योजना कर्मियों की अस्थिर स्थिति पर चिंता जताई, जबकि अन्य वक्ताओं में सीटू के महासचिव अनुपम कुमार, एक्टू के महासचिव आर.एन. ठाकुर, इंटक के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह, एआईयूटीयूसी के सचिव सूर्यकर जितेंद्र, बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव रामचंद्र महंतों और राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर शामिल थे। प्रदर्शन में गजनफर नवाब, सुरेंद्र सौरभ, मिथलेश जा, सुधीर कुमार, कुमार विंदेश्वर, अमर नाथ, हरिदेव ठाकुर, प्रमोद नंदन और मनोज कुमार समेत लगभग 300 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभा के अंत में नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मजदूरों और किसानों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा।यह “काला दिवस” न केवल नीतियों के विरोध में बल्कि श्रमिक-किसान और योजना कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई को उजागर करने वाला बड़ा आयोजन बनकर उभरा।















