दरभंगा, 01 अप्रैल (अजय यादव) नागर विमानन मंत्रालय की अहम बैठक में दरभंगा और मिथिला क्षेत्र को देश के उभरते एविएशन केंद्र के रूप में विकसित करने का बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में आयोजित परामर्शदात्री समिति की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने दरभंगा हवाई अड्डे को पूर्वी भारत का प्रमुख विमान अनुरक्षण (MRO) केंद्र बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि इससे एयरलाइंस की लागत घटेगी, सेवाएं तेज होंगी और पूरे मिथिला क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। सांसद ने विमान और उसके पुर्जों के निर्माण के लिए दरभंगा में औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने एमएसएमई और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की बात कही, ताकि “मेक इन इंडिया” को मजबूती मिल सके। प्रस्ताव के तहत स्थानीय स्तर पर एविएशन कंपोनेंट्स निर्माण इकाइयों की स्थापना का रोडमैप तैयार करने की मांग भी उठी।

पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए मिथिला के नदियों और जलाशयों को ध्यान में रखते हुए सी-प्लेन सेवा शुरू करने का सुझाव दिया गया। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट और विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई गई। युवाओं के रोजगार पर भी खास फोकस रहा। दरभंगा में एविएशन स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलने की सिफारिश की गई, जहां एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, ग्राउंड हैंडलिंग और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा सके। इसके लिए पीपीपी मॉडल के जरिए निजी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया गया। इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को लेकर भी कई अहम सुझाव सामने आए। रनवे विस्तार, नाइट लैंडिंग सुविधा, आधुनिक टर्मिनल, यात्री सुविधाओं में सुधार और उड़ानों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। साथ ही हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे शहरों के लिए नई सीधी उड़ानें शुरू करने तथा नेपाल और खाड़ी देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी पर विचार करने की बात कही गई।एयर कार्गो टर्मिनल स्थापित कर मखाना, मछली और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा दरभंगा एयरपोर्ट का नाम महान कवि बाबा विद्यापति के नाम पर रखने की मांग दोहराई गई।यह पहल मिथिला को देश के एविएशन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।














