पटना, 29 जून (पटना डेस्क) भागलपुर जिला के अभिलेखागार से जमीन संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब या क्षतिग्रस्त होने का मामला गंभीर होता जा रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी सूची में खुलासा हुआ है कि कहलगांव अनुमंडल के 430 मौजों के कैडेस्ट्रल सर्वे से जुड़े मूल अभिलेख रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं हैं। कई दस्तावेज इतने क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि उनका उपयोग करना भी संभव नहीं रह गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 205 गांवों के अभिलेख कहलगांव अंचल से गायब या खराब पाए गए हैं। इसके अलावा सन्हौला अंचल के 148 तथा पीरपैंती अंचल के 77 गांवों के कैडेस्ट्रल सर्वे रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं हैं।

इन दस्तावेजों के अभाव में भूमि सर्वेक्षण, दाखिल-खारिज और राजस्व न्यायालयों में लंबित भूमि विवादों के निष्पादन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुराने अभिलेखों की अनुपलब्धता के कारण कई मामलों में जमीन की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व का सत्यापन प्रभावित हो रहा है। इससे आम लोगों के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों और न्यायालयों के समक्ष भी व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने आम रैयतों, अधिवक्ताओं और संबंधित पक्षों से सहयोग की अपील की है।

जिन लोगों के पास पुराने कैडेस्ट्रल सर्वे की प्रमाणित प्रतियां सुरक्षित हैं, उनसे अनुरोध किया गया है कि वे दस्तावेजों को स्कैनिंग के लिए उपलब्ध कराएं। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि डिजिटल कॉपी तैयार करने के बाद मूल दस्तावेज पूरी सुरक्षा के साथ वापस लौटा दिए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण होने से भविष्य में भूमि विवादों के निपटारे में पारदर्शिता आएगी और जमीन से जुड़े मामलों का समाधान अधिक तेजी और सटीकता के साथ किया जा सकेगा।














