• Home
  • मुख्य समाचार
  • कला विश्वविद्यालय के जरिए बदलेगी बिहार की सांस्कृतिक तस्वीर, भिखारी ठाकुर के नाम पर बनेगा भव्य संग्रहालय
Image

कला विश्वविद्यालय के जरिए बदलेगी बिहार की सांस्कृतिक तस्वीर, भिखारी ठाकुर के नाम पर बनेगा भव्य संग्रहालय

पटना, 19 मई (अविनाश कुमार) बिहार में कला और संस्कृति के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार अब राष्ट्रीय स्तर का कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी में जुट गई है। इसके साथ ही भोजपुरी लोकनाट्य के अमर कलाकार भिखारी ठाकुर की स्मृतियों को सहेजने के लिए उनके नाम पर संग्रहालय बनाने की पहल भी शुरू कर दी गई है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने दोनों परियोजनाओं पर प्रारंभिक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो बिहार उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां समर्पित कला विश्वविद्यालय संचालित हैं। फिलहाल दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इस तरह के संस्थान मौजूद हैं।

राज्य में फिलहाल फाइन आर्ट्स की पढ़ाई सीमित स्तर तक ही उपलब्ध है। पटना आर्ट कॉलेज में दृश्य कला की शिक्षा दी जाती है, लेकिन संगीत, नृत्य और रंगमंच जैसी मंचीय कलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय नहीं है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में छात्रों और कलाकारों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।सूत्रों के अनुसार, कला संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर सिद्धांत रूप से सहमति बना ली है। अब विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी के लिए भेजने की प्रक्रिया चल रही है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय में संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोककलाओं की व्यवस्थित पढ़ाई कराई जाएगी।

यहां अनुभवी कलाकारों और विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति होगी ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और अकादमिक दोनों तरह का प्रशिक्षण मिल सके। दूसरी ओर, भोजपुरी संस्कृति को नई पहचान देने वाले भिखारी ठाकुर के नाम पर बनने वाले संग्रहालय में उनके जीवन, साहित्य और रंगमंचीय योगदान से जुड़ी दुर्लभ सामग्री संरक्षित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे बिहार की लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि योग्य शिक्षकों, प्रशिक्षकों और आधुनिक बुनियादी ढांचे की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। बावजूद इसके सरकार को उम्मीद है कि यह पहल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच उपलब्ध कराएगी।

Releated Posts

शिक्षा विभाग में बड़ा उलटफेर: क्लर्कों का होगा राज्यस्तरीय तबादला, 30 दिन में सातवें वेतनमान पर फैसला, भागलपुर से शुरू होगा गुरुकुलम

पटना, 21 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार में शिक्षा विभाग को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की दिशा में शिक्षा…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 21, 2026

डुमरांव बाईपास को रेलवे की हरी झंडी, 210 करोड़ की परियोजना से बदलेगी शहर की तस्वीर

बक्सर, 20 अक्टूबर (विक्रांत) डुमरांव बाजार में लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने और शहर के बाहर…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 20, 2026

नवमी की रात नवादा में मौत का तांडव: अलग-अलग हादसों में तीन की मौत, आठ घायल, मातम में बदली मेले की खुशियाँ

पटना, 20 अक्टूबर (पटना डेस्क) दुर्गा पूजा की नवमी की रात नवादा जिले में सड़क हादसों ने त्योहार…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 20, 2026

विधान परिषद चुनाव से पहले PK का बड़ा दावा: बोले- NDA में नहीं है तालमेल, आठों सीटों पर जीत का दावा खोखला

पटना, 20 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने के साथ ही…

ByByअशोक अश्क अक्टूबर 20, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top