मुजफ्फरपुर, 07 जून (संतोष गुप्ता) एसकेएमसीएच जैसे बड़े सरकारी अस्पताल के आसपास फल-फूल रहे अवैध नर्सिंग होमों के खिलाफ शनिवार को की गई बड़ी छापेमारी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की सुस्ती के कारण पूरी तरह बेअसर साबित होती दिखी। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं बरामद होने के बावजूद नर्सिंग होम संचालक को कुछ ही घंटों में निजी मुचलके पर छोड़ दिए जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं। एसडीओ पूर्वी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसकेएमसीएच के आसपास संचालित कई निजी नर्सिंग होमों की जांच की। इस दौरान एक हेल्थ केयर नर्सिंग होम में वर्ष 2023 की भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं बरामद की गई।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में समाप्त अवधि की दवाओं का मिलना मरीजों की जान से खिलवाड़ और गंभीर लापरवाही का मामला है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने नर्सिंग होम संचालक सुधीर कुमार को हिरासत में लिया और आगे की कार्रवाई के लिए अहियापुर थाना पुलिस को सौंप दिया। हालांकि, कार्रवाई का पूरा मामला कुछ ही घंटों में ठंडे बस्ते में चला गया। आश्चर्यजनक रूप से न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को कोई लिखित शिकायत या प्राथमिकी सौंपी। उधर, अहियापुर थाना पुलिस ने भी कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

पुलिस अधिकारियों का कहना था कि बिना लिखित आवेदन या प्राथमिकी के कानूनी कार्रवाई संभव नहीं थी। परिणामस्वरूप संचालक सुधीर कुमार को पीआर बांड पर रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जिले में अवैध स्वास्थ्य कारोबार और विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसाद अस्पताल अग्निकांड जैसी दर्दनाक घटनाओं के बाद भी संबंधित विभागों की कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की छापेमारी पर उनके ही मातहतों की निष्क्रियता ने पानी फेर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो मरीजों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी रहेगी।















