पटना, 21 सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में सोमवार को बड़ा बदलाव सामने आया। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा के विधान पार्षद सिंह के पद छोड़ने के साथ ही अब विधान परिषद की अगली सभापति की कुर्सी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ताजा रिपोर्टों में यह पद जदयू के खाते में जाने की चर्चा है। संभावित नामों में विधान परिषद के मौजूदा उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय प्रमुखता से सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पद रिक्त होने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, उन्हें स्थायी सभापति बनाए जाने की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

रामवचन राय जुलाई 2024 में विधान परिषद के उपसभापति चुने गए थे और लंबे समय से सदन से जुड़े रहे हैं। सभापति पद खाली होने की स्थिति में उनके अनुभव के कारण उनका नाम संभावित व्यवस्था के तौर पर चर्चा में है। अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को भाजपा और जदयू के बीच महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद की सभापति की कुर्सी जदयू को मिलने की चर्चा ने जोर पकड़ा है। यह राजनीतिक समीकरण संबंधी आकलन है; अंतिम निर्णय और औपचारिक प्रक्रिया अभी बाकी है।

फिलहाल बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर अवधेश नारायण सिंह को सभापति और रामवचन राय को उपसभापति के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इस्तीफे के बाद औपचारिक रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिक्त पद के लिए आगे संवैधानिक प्रक्रिया किस तरह पूरी होती है और जदयू की ओर से किस नाम पर अंतिम मुहर लगती है।

















