पटना, 17 सितम्बर (अविनाश कुमार) बिहार के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और बेहतर बनाने को लेकर स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने अधिकारियों को कई सख्त निर्देश दिए हैं। बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने अस्पतालों की ओपीडी में शत-प्रतिशत डिजिटल पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा। आभा आधारित पंजीकरण, ईएचआर निर्माण, ऑनलाइन परामर्श और चिकित्सकों की ऑनलाइन उपस्थिति की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया गया। आईपीडी में भर्ती प्रत्येक मरीज का भाव्या पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा गया। स्वास्थ्य सचिव ने रेफरल व्यवस्था की नियमित निगरानी पर जोर देते हुए अनावश्यक रेफरल से बचने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जच्चा और बच्चा की मृत्यु रोकने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था के हर स्तर पर गंभीरता से काम करना होगा।

किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं का चयन निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप करने का निर्देश दिया गया। बैठक में जिला अस्पतालों को अति-विशिष्ट चिकित्सा केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। टीबी मुक्त और एनीमिया मुक्त बिहार अभियान पर विशेष जोर देने को कहा गया। बैठक में बीएमएसआइसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिला अस्पतालों में सर्जरी सेवाओं की समीक्षा में बताया गया कि जून 2026 में 2,428, जुलाई में 5,650 और अगस्त में 8,209 सर्जरी हुई।

आयुष्मान भारत योजना के तहत इसी अवधि में क्रमशः 1,000, 1,331 और 1,626 सर्जरी के दावे दर्ज किए गए। अस्पतालों में रंग-रोगन, लघु मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रतीक्षालय, नर्सिंग डेस्क और मरीज सुविधाओं से जुड़े कार्य चल रहे हैं। इन सभी निर्धारित कार्यों को 31 अक्टूबर तक पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।राज्य के 36 जिला अस्पताल, 56 अनुमंडलीय अस्पताल, 49 रेफरल अस्पताल, 332 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 110 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 147 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 844 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में विभिन्न स्तर पर कार्य जारी हैं।













