बक्सर, 16 सितम्बर (विक्रांत) भोजपुरी के चर्चित व्यंग्य कवि विश्वनाथ प्रसाद ‘शैदा’ की वर्षों पुरानी रचना आज डुमरांव की मौजूदा सड़क और सफाई व्यवस्था को लेकर फिर चर्चा में आ गई है। दिवंगत भीखारी ठाकुर के बाद भोजपुरी के द्वितीय शेक्सपीयर की संज्ञा से नवाजे गए ‘शैदा’ करीब 13 रचनाओं के रचयिता रहे हैं। बताया जाता है कि उन्होंने तत्कालीन डुमरांव राज के मैनेजर एवं नगर पालिका के संचालक दिवंगत बाबू सुग्रीव सिंह के समक्ष नगर की सफाई और सड़क यातायात व्यवस्था को लेकर यह व्यंग्य रचना सुनाई थी। नगर के प्रबुद्ध साहित्यकार और अधिवक्ता शंभू शरण श्रीवास्तव उर्फ नवीन ने डुमरांव की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए ‘शैदा’ की उस रचना को आज भी प्रासंगिक बताया है।

उन्होंने मुख्य सड़क की बदहाली तथा राजगोला रोड और चौक रोड पर लगने वाले जाम की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस व्यवस्था पर कवि ने वर्षों पहले व्यंग्य किया था, उससे मिलती-जुलती स्थिति आज भी दिखाई दे रही है।इसी तरह पटना में पत्रकार रह चुके स्थानीय नागरिक प्रियरंजन राय ने भी शैदा की व्यंग्य रचना को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ते हुए इसे सटीक बताया। उनकी चर्चित पंक्तियां “डुमरांव शहर को सड़क और सफाई से क्या वास्ता, जिधर देखिए उधर हंस रहा रास्ता” आज शहर की बदहाल व्यवस्था पर लोगों का ध्यान खींच रही हैं।

पुरानी व्यंग्य रचना के बहाने एक बार फिर डुमरांव की सड़क, सफाई और यातायात व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साहित्यकार की दशकों पुरानी पंक्तियां आज भी शहर की जमीनी तस्वीर से जुड़ी महसूस होती हैं।














