बक्सर, 15 सितम्बर (विक्रांत) गंगा की उफनती धारा में बह जाने के बाद जिस महिला की तलाश में परिजन दस दिनों से दर-दर भटक रहे थे, वह सोमवार को अचानक जिंदा मिल गई। बिहार के बक्सर जिले से बहकर बलिया पहुंची 55 वर्षीय सुनैना देवी चैनछपरा गांव के सामने बाढ़ के पानी से घिरे परवल के खेत में बनी झोपड़ी में कई दिनों तक जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष करती रहीं। सोमवार सुबह बाहर निकलने के दौरान वह गहरे पानी में फंसकर डूबने लगीं। उनकी चीख-पुकार सुनकर पास में मछली पकड़ रहे मल्लाहों ने मौके पर पहुंचकर उनकी जान बचा ली। बक्सर के कपुरपट्टी गांव निवासी जनार्दन गोंड की पत्नी सुनैना देवी करीब दस दिन पहले गंगा में स्नान करते समय अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गई थीं। देखते ही देखते वह पानी के साथ बह गईं। घटना के बाद परिजनों ने नदी के किनारे और आसपास के इलाकों में उनकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।

बाद में बिहार में उनकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई। बताया गया कि गंगा की धारा उन्हें बहाकर बलिया के चैनछपरा गांव के सामने ले आई। यहां बाढ़ के पानी से घिरे परवल के खेत में बनी एक झोपड़ी उनका सहारा बन गई। किसी तरह वह झोपड़ी तक पहुंचीं, लेकिन चारों ओर पानी होने के कारण बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थीं। करीब दस दिनों तक उन्होंने उसी झोपड़ी में रहकर मदद का इंतजार किया। इस दौरान खाने-पीने के लिए कोई साधन नहीं था। सुनैना के अनुसार, उन्होंने गंगा का पानी पीकर किसी तरह अपनी जान बचाई।सोमवार सुबह उन्होंने झोपड़ी से बाहर निकलने का प्रयास किया। इसी दौरान वह गहरे पानी में फंस गईं और डूबने लगीं। बचने की आस में वह जोर-जोर से ‘शिवगुरु-शिवगुरु’ पुकारने लगीं। उनकी आवाज मछली पकड़ रहे मल्लाहों तक पहुंची तो वे तत्काल उनकी ओर दौड़े।

काफी मशक्कत के बाद महिला को पानी से बाहर निकाला गया।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सुनैना को थाने ले गई। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उनके परिजनों को सूचना दी। मां के जिंदा मिलने की खबर सुनते ही तीनों बेटे राजू गोंड, जितेंद्र गोंड और कमलेश गोंड भावुक हो उठे। दस दिन तक लापता मां के सकुशल मिलने से परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। गंगा की धारा में बहने के बाद महिला का इस तरह जीवित मिलना इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।













