पटना, 15 सितम्बर (अविनाश कुमार) समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान के बाद बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर मतभेद के संकेत सामने आने लगे हैं। गठबंधन के अलग-अलग घटक दलों ने यूसीसी पर अलग रुख अपनाया है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने समर्थन के संकेत दिए हैं, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने मसौदा देखने के बाद अंतिम फैसला लेने की बात कही है। वहीं जदयू ने अपने पुराने रुख का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है।जदयू विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने स्पष्ट कहा है कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पहले से ही यूसीसी का विरोध करते रहे हैं।

हालांकि, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद की ओर से अब तक कोई सीधा बयान नहीं आया है। राजीव रंजन ने कहा कि संजय झा इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे।लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा सार्वजनिक होने से पहले वह कोई अंतिम टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। मसौदे के प्रभाव का आकलन और सभी हितधारकों से व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना रुख स्पष्ट करेगी।राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी सीधे समर्थन से दूरी बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का प्रस्ताव आने के बाद उसे देखा जाएगा और फिर पार्टी के भीतर विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा।

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने यूसीसी के प्रति सकारात्मक रुख जताते हुए कहा कि अमित शाह ने यदि घोषणा की है तो इसमें देशहित जरूर होगा। घटक दलों से विमर्श के बाद इसे लागू करने में कोई परेशानी नहीं दिखती। उन्होंने इसे दूरगामी तौर पर देश के लिए बेहतर बताया।इधर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाने वाले बयान से सियासी तापमान और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आजादी के समय यूसीसी लागू नहीं होने दिया और देश को पीछे धकेला। उनके बयान के बाद एनडीए के उन सहयोगी दलों की मुश्किल बढ़ गई है, जो फिलहाल मसौदा देखने की बात कहकर सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में यूसीसी बिहार एनडीए के लिए एक नए सियासी इम्तिहान के रूप में सामने आता दिख रहा है।













