समस्तीपुर, 12 सितम्बर (हर्षिता “अश्क”) जिले में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। जिले की करीब 2,33,212 आबादी बाढ़ से प्रभावित है। प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, राहत सामग्री और सुरक्षित आवागमन पहुंचाने के साथ पशुओं की देखभाल के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिले में 121 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। इन रसोइयों के माध्यम से अब तक 4,22,591 मील परोसे जा चुके हैं। प्रशासन द्वारा कम्युनिटी किचन में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमित संचालन पर विशेष नजर रखी जा रही है।

बाढ़ से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए अब तक 36,800 पॉलिथीन शीट्स का वितरण किया जा चुका है। जरूरत के अनुसार अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जा रही है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए 22 मेडिकल कैंप लगातार सक्रिय हैं। यहां लोगों की स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ में इंसानों के साथ पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। प्रभावित क्षेत्रों में 17 पशु राहत कैंप और शेड संचालित किए जा रहे हैं। पशुपालकों और पशुओं के लिए अब तक 1,044 क्विंटल चारा व भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है। पशुओं के उपचार के लिए 17 पशु चिकित्सा कैंप चल रहे हैं, जहां अब तक 2,531 पशुओं का इलाज किया जा चुका है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत-बचाव अभियान को गति देने के लिए तीनों प्रभावित प्रखंडों में 227 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इन्हीं नावों के जरिए प्रभावित लोगों को सुरक्षित आवागमन के साथ जरूरतमंद इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर राहत कार्यों का अनुश्रवण करने और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर भोजन, चिकित्सा, आश्रय, राहत सामग्री और सुरक्षित आवागमन की सुविधा पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।














