मुंगेर, 08 सितम्बर (प्रभात यादव) गंगा के उफान ने मुंगेर जिले के तटवर्ती इलाकों में तबाही मचा दी है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने के बाद बरियारपुर प्रखंड के निचले और कछारी इलाकों में पानी घुस गया है। मुरला मुशहरी गांव में दर्जनों घर जलमग्न हो गए हैं। इसी जलप्रलय के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने बाढ़ की भयावहता के बीच मानवीय संवेदना और सात फेरों के वचन को जीवंत कर दिया।मुरला मुशहरी निवासी जीतो सदा का घर जब बाढ़ के पानी में डूब गया तो सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकलने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। प्रशासनिक नाव उपलब्ध नहीं होने के बीच जीतो ने कबाड़, बोरियों में लिपटे थर्मोकोल के टुकड़ों और बांस की फट्टियों को रस्सियों से बांधकर अस्थायी नाव यानी चांचर तैयार की।

इसके बाद उन्होंने अपनी लाचार पत्नी पार्वती देवी को उस पर बैठाया और खुद बांस की पतली लग्गी के सहारे गहरे पानी में आगे बढ़ने लगे।तेज बहाव और लहरों के बीच थर्मोकोल की नाव लगातार डगमगा रही थी। पार्वती देवी उस पर सिमटकर बैठी थीं। आंखों के सामने घर और जीवनभर की जमा-पूंजी के पानी में समा जाने का दर्द था। दूसरी ओर जीतो हर कदम बेहद सावधानी से बढ़ा रहे थे। उन्हें डर था कि जरा सी चूक दोनों की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है।जीतो ने भावुक होकर कहा कि सात फेरे लेते समय उन्होंने सुख-दुख में साथ रहने की कसमें खाई थीं। जब सैलाब घर को बहा ले गया, तब पत्नी को अकेला कैसे छोड़ सकते थे। घर भले डूब गया, लेकिन जब तक सांस है, पत्नी का हाथ नहीं छूटेगा। गंगा के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण बरियारपुर के कई गांवों में संकट गहरा गया है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है।

ग्रामीण निजी जुगाड़ की नावों और केले के थंब के सहारे सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। मुरला मुशहरी के सैकड़ों परिवार मवेशियों और जरूरी सामान के साथ रेलवे ट्रैक, राष्ट्रीय राजमार्ग और तटबंधों के किनारे शरण लेने को विवश हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त सरकारी नावों का परिचालन, सूखा राशन और पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराने की मांग की है। बाढ़ के बीच जीतो-पार्वती की तस्वीर ने जहां आपदा की भयावहता दिखाई, वहीं मुश्किल वक्त में साथ निभाने की मिसाल भी पेश कर दी।













